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गाँधी और अम्बेडकर एक-दूसरे के पूरक थे - प्रो. संजय जैन
September 26, 2019 • अरुण भोपाळे
उज्जैन। पिछले दो दशकों से विश्व के कई देशों में राज्य की दमन शक्ति ने गाँधीवादी तरीके अपनाए हैं। पूर्व यूरोप के देशों में रक्तहीन क्रांति हो, सुंदरलाल बहुगुणा और बाबा आमटे तक वंदना, शिवा से लेकर मेघा पाटकर तक, मार्टिन लूथर किंग से लेकर डेस्मन टूटू व नेल्सन मंडेला तक धरना, उपवास, सविनय अवज्ञा, सत्याग्रह ये तमाम गाँधीवादी अस्त्र कारगर सिद्ध हुए हैं। गाँधी सार्वकालिक प्रासंगिक व्यक्ति हैं।
उक्त विचार श्री अटलबिहारी वाजपेई शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, इन्दौर के राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष, प्रसिद्ध अभिनेता, रंगकर्मी, गाँधीवादी विचारक प्रो. संजय जैन ने व्यक्त किए। डॉ. अम्बेडकर पीठ द्वारा आयोजित 'महात्मा गाँधी की 150 जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजितÓ 'गाँधी-अम्बेडकर विचार : युवा पीढ़ी एवं सामाजिक समरसताÓ विषय पर प्रो. जैन ने कहा जिन मूल्यों को गाँधी ने जिया है वह जाति, देश के मूल्य नहीं थे। वे वैश्विक चेतना की अभिव्यक्ति थे। गाँधीजी प्रयोगशील व्यक्ति थे, उन्होंने कोई भी विचार बौद्धिक स्तर पर स्वीकार नहीं किया, बल्कि उन्होंने उसका प्रयोग करके देखा। गाँधी और अम्बेडकर के रिश्ते बहुत अच्छे और नजदीक के थे। जहाँ गाँधी की दृष्टि समावेशी थी, वहीं अम्बेडकर एकांतिक थे। अम्बेडकर एक मिशन को लेकर चल रहे थे। दोनों महानतम व्यक्ति थे। दोनों में दलितोद्धार को लेकर चिंता थी। गाँधी मानवता के मापदण्ड और मानदण्ड दोनों हैं। अम्बेडकर सामाजिक नेता थे। अम्बेडकर, गाँधी मार्ग से होते हुए बुद्ध तक पहुँचे। युवा पीढ़ी को गाँधी-अम्बेडकर से अनुशासन जीवन प्रबंधन, एकाग्रता, सादगी जैसे विचारों को आत्मसात करने की आवश्यकता है।
कुलानुशासक प्रो. शैलेन्द्र शर्मा ने कहा गाँधी-अम्बेडकर ने आध्यात्मिक और नैतिक रूप से समाज कार्य किया है। दोनों ने समाज में पारस्परिकता, समानता-समन्वयक को स्थापित किया है। जाति, सम्प्रदाय, भाषा-विभेद को खत्म कर बंधुत्व को बढ़ाने की व्यापक विश्वचेतना से गाँधी-अम्बेडकर ने जोड़ा है। डॉ. अम्बेडकर पीठ के प्रभारी निदेशक डॉ. एस.के. मिश्रा ने अपने स्वागत भाषण में कहा वर्तमान में गाँधी-अम्बेडकर को सही परिप्रेक्ष्य में समझने की आवश्यकता है। समाज के बहुत बड़े वर्ग में दोनों महामना का योगदान अद्वितीय है। विद्यार्थी कल्याण संकाय के संकायाध्यक्ष व प्रा.भा.इ.सं. एवं पुरातत्त्व अध्ययनशाला के अध्यक्ष डॉ. आर.के. अहिरवार ने कहा अम्बेडकर-गाँधी की समाज दृष्टि बहुत व्यापक थी। उन्होंने समाज में समानता-बंधुत्व व सामाजिक समरसता के लिए ही सामाजिक आंदोलन किए हैं। अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए सेवानिवृत्त प्रो. गोपालकृष्ण शर्मा (राजनीति विज्ञान अध्ययनशाला के पूर्व अध्यक्ष) ने कहा अम्बेडकर-गाँधी का विराट् व्यक्तित्व है। उनकी जीवन शैली को दैनिक व्यवहार में उतारने का प्रयास करना होगा। एक संस्कारित और मूल्य आधारित जीवन कैसा हो, ये गाँधी-अम्बेडकर ने बताया नहीं करके दिखाया है। प्रो. शर्मा ने कहा जब तक प्रकति रहेगी गाँधी-अम्बेडकर रहेंगे।
तीन दिवसीय आयोजन का समापन व्याख्यान से हुआ। पहले दिन निबन्ध प्रतियोगिता, दूसरे दिन पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था, जिनके परिणामों की घोषणा की गई।
निबंध- १. नंदिनी बामोरिया, २. रुचि तिवारी, रिमझिम दुबे, ३. ज्योतिबारोलिया पोस्टर- १. आरथासिंह हाड़ा, २. पीयूष शर्मा, ३. रुचि तिवारी। अतिथि परिचय, परिणाम की घोषणा व आभार शोध अधिकारी डॉ. निवेदिता वर्मा ने दिया। संचालन डॉ. प्रीति पांडे ने किया। डॉ. विश्वजीत परमार, डॉ. धीरेन्द्र सोलंकी, डॉ. हेमन्त लोदवाल, डॉ. लोट, डॉ. शाह विशेष रूप से उपस्थित थे।