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विश्व हृदय दिवस पर आलेख
September 28, 2019 • डॉ. प्रकाश जोशी, डॉ. जितेंद्र कुमार जैन

समय से पहले होने वाले मौतों में कम से कम 80 प्रतिशत हृदय के रोगों के कारण होती है
विश्व हृदय दिवस दिल के रोगों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए 29 सितंबर को मनाया जाता है। इसे हर साल एक थीम बेस तरीके से मनाया जाता है। विश्व हृदय दिवस पर इस वर्ष की थीम है। मेरा दिल तेरा दिल पर रखी गई है। हृदय से जुड़े विषयों पर ध्यान खींचने के लिए प्रत्येक वर्ष इसे एक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के अनुसार समय से पहले होने वाले मौतों में कम से कम 80 प्रतिशत हृदय के रोगों के कारण होती है। हृदय शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है जो शरीर के समस्त अंगों को शुद्ध रक्त प्रदान करता है व शरीर के समस्त अंगों से अशुद्ध रक्त को ग्रहण करता है।
आयुर्वेद के मतानुसार शरीर में 107 मर्म होते हैं जिनमें से तीन प्रमुख मर्म हृदय वस्ति नाभि हैं। हृदय एक सधय: प्राण हर मर्म है। 6 अंगों से युक्त शरीर बुद्धि, इंद्रियां, इंद्रियों के विषय आत्मा प्राण पर ओज मन, मन के विषय ये सब हृदय में आश्रित होते हैं। यदि हृदय की गति रुक जाए तब सारा शरीर कार्य रहित हो जाता है। इसीलिए आयुर्वेद में हृदय को प्रधान माना गया है।
कोरोनरी हृदय रोग सामान्यत: जिसे हृदय रोग कहते हैं, संसार में मृत्यु और कार्य क्षमता घटने का सबसे प्रमुख कारण है। ज्यादातर विकासशील देशों जैसे भारत में इसकी संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में लगभग 7.5 करोड़  इस बीमारी से ग्रस्त हैं। हो सकता है कि अगले आप हों। 
कोरोनरी हृदय रोग कोरोनरी धमनी में वसा के जमाव से होता है। यह जमाव 15 साल की उम्र से पहले ही शुरू हो जाता है और इसकी गति 2 परसेंट से 6 परसेंट प्रतिवर्ष रहती है। इसके बढ़ने की गति शरीर में उपस्थित कारकों पर निर्भर करती है। चिकित्सीय विज्ञान में इसे रिस्क फैक्टर कहते हैं। जब तक जमाव 70 प्रतिशत से अधिक नहीं हो जाता तब तक कठिनाई महसूस नहीं होती है। वसा के जमाव के कारण रक्त या ऑक्सीजन की कमी से हृदय में होने वाले दर्द को एनजाइना कहते हैं।
एंजाइना एक प्रकार का दर्द, भारीपन, बेचैनी है। इसका प्रमुख लक्षण छाती में बाई तरफ दर्द या भारीपन, नाड़ी की गति बढ़ना, कभी-कभी दाएं तरफ बाहों में पीठ, जबड़े में दर्द, बाएं बाजू में दर्द, सांस लेने में परेशानी होते हैं। ज्यादातर ये लक्षण मेहनत के साथ बढ़ते तथा विश्राम करने पर कम हो जाते हैं।

हृदय रोगों से संबंधित जांच
ब्लड कोलेस्ट्रॉल की जांच ईसीजी, टीएमटी, एंजियोग्राफी, कार्डियोग्राफी, नियमित ब्लड प्रेशर की जांच,  मायो कार्डियल, परफ्यूशन स्कैन

हृदय रोगों से बचाव के तरीके
नियमित व्यायाम करें
स्मोकिंग को करें ना
कम करें नमक 
पशु उत्पादों का सेवन ना करें 
सब्जियों का सेवन करें 
फलों का सेवन ज्यादा करें
अर्जुन की छाल का सेवन करें 

हृदय रोगों से बचने के लिए योगासन
पादहस्तासन, त्रिकोणासन, शशांक, आसन, वक्रासन, उत्तानपादासन, मेरुदंड आसन, भुजंगासन, शवासन, शलभासन,

डॉ. प्रकाश जोशी
मो. 9406606067
डॉ. जीतेंद्र कुमार जैन 
शास. धन्वंतरि आयुर्वेद महाविद्यालय, उज्जैन (म.प्र.)