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सर्दियों के मौसम के शुरुआत में आती शरद नवरात्रि
October 1, 2019 • सोशल मीडिया से साभार

"नवरात्रि” – शब्द दो शब्दों का संयोजन है- नवा (अर्थ नौ) और रात्री (अर्थ रात) । नौ रातों और नौ दिनों को नवरात्रों के रूप में मनाया जाता है।

भारत में मनाए जाने वाले तीन मुख्य नवरात्रि शरद नवरात्रि, वसंत नवरात्रि और अशदा नवरात्रि हैं।

नवरात्रि त्यौहारों में शरद नवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण है। यह सर्दियों की शुरुआत में मनाया जाता है, यानी शरद ऋतु में (सितंबर / अक्टूबर का महीना) यह मनाने का ख़ास कारण है की इस वक्त देवी दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध किया गया था जिसका जश्न मनाया जाता है।

वसंत नवरात्रि गर्मियों की शुरुआत के दौरान मनाया जाता है जो मार्च / अप्रैल के महीने में होता है। मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है।

अशदा सीजन के दौरान हिमाचल प्रदेश राज्य में अशदा नवरात्रि मनाया जाता है जो जुलाई-अगस्त महीने में होता है।
नवरात्रि के साथ सर्द और वसंत ऋतु का भी आगमन होता है।

गुजरात और मुंबई में, नवरात्रि की हर रात को गरबा नृत्य किया जाता है जो बहुत प्रसिद्ध है।

नवरात्रि के दिनों में अगर आपको सपने में सफेद सांप दिखाई देता है तो यह बहुत ही सुबह होता है। इससे लक्ष्मी की कृपा होती है।

अगर कोई कन्या आपको नवरात्रि के दिनों में सिक्का देती है तो यह बहुत ही शुभ माना जाता है , इससे धन का लाभ होता है।

बंगाल में नवरात्रि के दिनों मे दुर्गा पूजा की जाती है जो बंगाल का पुरे साल का सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है।

दुर्गा देवी आठ भुजाओं से युक्त हैं जिन सभी में कोई न कोई शस्त्रास्त्र होते है।

हिन्दू ग्रन्थों में वे शिव की पत्नी पार्वती के रूप में वर्णित हैं, जिन्हें दुर्गा का 8वां रूप गौरी कहा जाता है।

वेदों में तो दुर्गा का व्यापाक उल्लेख है, किन्तु उपनिषद में देवी “उमा हैमवती” (उमा, हिमालय की पुत्री) का वर्णन है।

पुराण में दुर्गा को आदिशक्ति माना गया है।
इसी आदि शक्ति देवी ने ही सावित्री(ब्रह्मा जी की पहली पत्नी), लक्ष्मी, और पार्वती(सती) के रूप में जन्म लिया और उसने ब्रह्मा, विष्णु और महेश से विवाह किया था।

तीन रूप मिलकर दुर्गा (आदि शक्ति) को पूरा करते हैं।नवरात्रि पर्व मनाने के पीछे बहुत-सी रोचक कथाएं प्रचलित हैं। आपके लिए प्रस्तुत हैं असुरों के नाश की एक रोचक कथा....
कहा जाता है कि दैत्य गुरु शुक्राचार्य के कहने पर दैत्यों ने घोर तपस्या कर ब्रह्माजी को प्रसन्न किया और वर मांगा कि उन्हें कोई पुरुष, जानवर और उनके शस्त्र न मार सकें।
वरदान मिलते ही असुर अत्याचार करने लगे, तब देवताओं की रक्षा के लिए ब्रह्माजी ने वरदान का भेद बताते हुए बताया कि असुरों का नाश अब स्त्री शक्ति ही कर सकती है।
ब्रह्माजी के निर्देश पर देवों ने 9 दिनों तक मां पार्वती को प्रसन्न किया और उनसे असुरों के संहार का वचन लिया। असुरों के नाश का पर्व है नवरात्रि। असुरों के संहार के लिए देवी ने रौद्र रूप धारण किया था इसीलिए शारदीय नवरात्रि शक्ति-पर्व के रूप में मनाया जाता है।
लगभग इसी तरह चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से 9 दिनों तक देवी के आह्वान पर असुरों के संहार के लिए माता पार्वती ने अपने अंश से 9 रूप उत्पन्न किए। सभी देवताओं ने उन्हें अपने शस्त्र देकर शक्ति संपन्न किया।

इसके बाद देवी ने असुरों का अंत किया। यह संपूर्ण घटनाक्रम चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से 9 दिनों तक घटित हुआ इसलिए चैत्र नवरात्रि मनाए जाते हैं।