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आज भारत में राष्ट्रवाद के द्वारा सकारात्मक वातावरण दिखाई दे रहा है : अशोक सोहनी
October 8, 2019 • अरुण भोपाळे

संघ स्थापना के विजयादशमी उत्सव के अंतर्गत 6 पथ संचलन निकाले गए


उज्जैन। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उज्जैन द्वारा विभिन्न स्थानों से नगर रचना के आधार पर 6 पथ संचलन निकाले गए, जिनमें स्वयंसेवकों ने घोष की रचनाओं की धुन पर कदमताल करते हुए संचलन किया। सभी कार्यक्रमों के प्रारंभ में अतिथियों द्वारा शस्त्र पूजन किया गया एवं गीत बौद्धिक प्रार्थना संपन्न हुई।
केशव नगर के विजयादशमी उत्सव के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्य क्षेत्र के संघचालक श्री अशोक सोहनी ने बताया कि आज देश में राष्ट्रवाद के माध्यम से एक रचनात्मक परिवर्तन दिख रहा है, जो कि लंबे समय से चली आ रही साधना का ही परिणाम है। भारत देश के परम वैभव की संघ की कल्पना साकार होते दिख रही है और महर्षि अरविंद, स्वामी रामकृष्ण परमहंस जैसे युगदृष्टा महापुरुषों की भविष्यवाणी सत्य होती हुई प्रतीत हो रही है, जिसके अंतर्गत संपूर्ण विश्व भारत की ओर वैश्विक कल्याण, शांति हेतु आशा एवं विश्वास की दृष्टि से देख रहा है। इसी प्रभाव के चलते शस्त्र पूजन विदेश में फ्रांस जैसे देश में भी संपन्न हो रहा है।
राजेंद्र नगर कार्यक्रम के मुख्य वक्ता बलराज भट्ट, उज्जैन विभाग संघचालक ने अपने उद्बोधन में संघ कार्य को वेदांत दर्शन से जोड़ते हुए बताया कि संघ के स्वयंसेवक प्राणी मात्र के कल्याण और सुख की कामना के लिए मातृभूमि की सेवा करते हैं। स्वयंसेवकों में वे सारे गुण निर्माण किए जाते हैं, जिसकी संकल्पना स्वामी विवेकानंद द्वारा राष्ट्रीय चेतना के निर्माण के लिए की गई है। श्री भट्ट ने बताया कि धर्म की रक्षा के लिए आततायियों के विरुद्ध शस्त्र साधना के साथ स्वयंसेवक भगवान राम के जीवन से समरसता युक्त आदर्श ग्रहण करते हुए राष्ट्र की साधना करते हैं।
माधव नगर के विजयादशमी उत्सव के मुख्य वक्ता राम गोपाल वर्मा, प्रांत गौ सेवा प्रमुख ने संघ संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार को याद करते हुए बताया कि डॉक्टर हेडगेवार युगदृष्टा थे। उन्होंने युगानुकूल संघ कार्य आरंभ किया एवं समग्र हिंदू समाज की संगठित शक्ति को जागृत करने हेतु अपना संपूर्ण जीवन बीज रूप में मिटा दिया, जिसके फलस्वरूप संघ का यह वटवृक्ष खड़ा हुआ है। श्री वर्मा ने बताया कि सन् 1925 ईस्वी में विजयादशमी के दिन संघ की स्थापना हुई थी और इस दिन सभी स्वयंसेवक सीमा उल्लंघन करते हुए समाज में जाकर संगठित एवं अनुशासित रूप से सज्जन शक्ति का प्रकटीकरण करते हैं।
विक्रमादित्य नगर के मुख्य वक्ता सांवरिया शर्मा उज्जैन विभाग बौद्धिक प्रमुख ने बताया कि अहिंसा परम धर्म जरूर है परंतु कायरता हिंसा नहीं हो सकती। आसुरी शक्ति का सर्वनाश करना ही धर्म है। यह हमारे पूर्वजों ने भी किया है। अपने समाज के लिए भाव जागरण करने का कार्य संघ कर रहा है। संगठन शक्ति के आगे बड़े-बड़े बलशाली को झुकना पड़ता है। सामान्य समाज में भी यदि शक्ति का भाव जागृत हो जाए तो आसुरी शक्ति रह नहीं सकती। छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप, चंद्रगुप्त मौर्य, गुरु गोविंद सिंह आदि महापुरुषों ने सामान्य समाज की शक्ति में ही साहस भरकर बड़े-बड़े आततायियों को नष्ट किया।
कालिदास नगर कार्यक्रम के मुख्य वक्ता धर्मेंद्र सिंह, विभाग सामाजिक समरसता प्रमुख ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए बताया कि भगवान श्रीराम ने सामाजिक समरसता के संदेश को अपने जीवन में प्रस्तुत कर संपूर्ण समाज का संगठन किया एवं अधर्म, अन्याय के प्रतीक रावण पर विजयश्री प्राप्त की। संघ स्थापना के विजयादशमी के दिन स्वयंसेवक भी अपनी संगठित शक्ति के माध्यम से संचलन करते हुए यह संदेश देते हैं कि विधर्मी शक्तियां और समाज को बांटने वाले तत्व सजग रहें। उन्होंने आह्वान किया कि सभी स्वयंसेवकों को समाज के साथ मिलकर आतंकवाद, अलगाववाद, जातिवाद जैसी आसुरी शक्तियों का विध्वंस कर समाज में शांति, कल्याण और प्रेम का वातावरण निर्माण करने हेतु आगे आना होगा।
मधुकर नगर उत्सव के मुख्य वक्ता रामप्रसाद पांडे प्रांत धर्म जागरण प्रमुख ने अपने वक्तव्य में बताया कि हिन्दू धर्म में अनादिकाल से शक्ति की उपासना होती है। आसुरी शक्ति के बढ़ने पर महापुरुष का जन्म होता है। बलहीन को कोई नहीं पूजता है। बलवानों को सभी पूजते हैं। कमजोर का कोई अस्तित्व नहीं होता है। ज्ञान के बल पर ही देश पूजनीय रहा है।
महानगर संघचालक श्रीपाद जोशी जी ने बताया कि इस वर्ष नगर रचना के आधार पर केशव नगर का पथ संचलन सरस्वती विद्या मंदिर, महाकाल मैदान से प्रारंभ होकर पुन: वहीं समाप्त हुआ। इसी प्रकार माधव नगर का जाल मैदान से, विक्रमादित्य नगर का क्षीरसागर मैदान से, राजेंद्र नगर का लोकमान तिलक विद्यालय नीलगंगा से और कालिदास नगर का पथ संचलन शुभम् मांगलिक परिसर से प्रारंभ होकर पुन: अपने-अपने प्रारंभ स्थान पर ही समाप्त हुए। मधुकर नगर का पथ संचलन वैदेही वाटिका, खाक चौक से प्रारंभ होकर सरस्वती विद्या मंदिर, पिपली नाका पर समाप्त हुआ।
विभिन्न नगरों के उत्सवों में मुख्य अतिथि सर्वश्री पंडित भविष्य गुरु भागवताचार्य, डॉ. उमेश जेठवानी, गुरु नानक हॉस्पिटल, विजय सुराणा, भैरवगढ़ प्रिंट, देशमुख नारायण भाई पटेल, पी. पटेल एंटरप्राइज, डॉ. राहुल तेजनकर, तेजनकर हॉस्पिटल एवं गिरीश जैन, जैन नमकीन केंद्र थे। यह जानकारी महानगर संघचालक श्रीपाद जोशी ने दी।

 

बोहरा समाज ने किया पथ संचलन का स्वागत
विजय-दशमी पर निकलने वाले पथ संचलन का नई-सड़क पर बोहरा समाज द्वारा स्वागत किया गया। बड़ी संख्या में समाज के वरिष्ठ एवं युवा कार्यकर्ताओं द्वारा पुष्प वर्षा की गई। सामाजिक कार्यकर्ता मुस्तफा ए पीठावाला के नेतृत्व में समाज के एहमदी भाई हरर वाला, सेफी भाई हरर वाला, फखरुद्दीन भाई, अमीर भाई अत्तर वाला, अली हैदर मेवा वाला, जाकिर भाई पीठावाला, मुस्तफा भाई बुरी वाला, हुसेन अत्तर वाला, मुफ्ददल सिरोंज वाला, युसुफ अत्तर वाला, शब्बीर शकरू वाला, मुर्तजा काँच वाला, जुल्फिकार मलोला वाला, हुजेफा पिपला वाला, मुस्तफा कोरासा वाला, नजमुद्दीन ईजी, शब्बीर अत्तर वाला, क़ासिम भाई पीठावाला, सफदर भाई पीठावाला आदि ने इस अवसर पर उपस्थित होकर पथ संचलन का स्वागत किया।