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आयुर्वेदिक औषधियों का शोधन और मारण यदि अच्छी तरह से हुआ है तो वह दुष्प्रभाव रहित होगा : डॉ. पति
October 30, 2019 • अरुण भोपाळे
उज्जैन। शासकीय स्वशासी धन्वन्तरि आयुर्वेद महाविद्यालय, उज्जैन के प्रधानाचार्य डॉ. जे.पी. चौरसिया ने बताया कि ३० अक्टूबर को फार्मेकोविजिलेंस अवेयरनेस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रो. डॉ. रूचि बघेल ने फार्मेकोविजिलेंस पर प्रकाश डाला। साथ ही यदि कोई ड्रग रिएक्शन करता है तो प्रापर चैनल उसकी जानकारी लेकर संबंधित विभाग को पहुंचाया जाता है। इसी प्रकार आयुष विभाग के पंडित खुशीलाल शर्मा, शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राध्यापक एवं कोऑर्डिनेटर डॉ. आर.के. पति द्वारा वर्तमान युग में औषधियों पर औषधियों के प्रभाव और उनकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिये औषधियों पर सतर्कता रखना अनिवार्य है।
आयुर्वेद में भी कई औषधियां विष, उपविष और रस औषधियां हैं, जिसका गलत तरीके से प्रयोग करने पर दुष्प्रभाव शरीर पर पड़ सकता है। इसलिए चिकित्सक की सलाह एवं औषधियों के उचित शोधन-मारण के पश्चात ही स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया जा सकता है। आयुर्वेद में कुचला, वत्सनाभ, भांग, पारद, गंधक एवं रस औषधियों आदि का प्रयोग सिर्फ चिकित्सकों की सलाह पर ही किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर डॉ. ओ.पी. व्यास, डॉ. सतुआ, डॉ. नृपेन्द्र मिश्र, डॉ. नरेश जैन, डॉ. शिरोमणि मिश्रा, डॉ. योगेश वाणे, डॉ. दिवाकर पटेल, डॉ. मुकेश गुप्ता, डॉ. रामतीर्थ शर्मा, डॉ. गीता जाटव, डॉ. हेमंत मालवीय, डॉ. राजेश जोशी आदि तथा चिकित्सालय एवं महाविद्यालय के प्राध्यापक, आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी एवं पीजी अध्येता उपस्थित थे। संचालन डॉ. शिरोमणि मिश्रा ने किया। आभार प्रदर्शन डॉ. नृपेन्द्र मिश्र ने किया। उक्त जानकारी प्रधानाचार्य डॉ. चौरसिया एवं मीडिया प्रभारी डॉ. प्रकाश जोशी ने दी।