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डिप्रेशन के बारे में रोचक तथ्य
June 15, 2020 • रोचक तथ्य से साभार • Knowledge


1. पूरी दुनिया में 35 करोड़ लोग डिप्रेशन के शिकार हैं.
2. महिलाओं के डिप्रेशन में जाने के चांस मर्दों के मुकाबले 2 गुणा ज्यादा होते हैं.
3. एंटीडिप्रेशेंट्स डिप्रेशन ठीक करने में 46-54 प्रतिशत तक कारगर होते हैं जबकि प्लेसबोस 31-38 प्रतिशत तक कारगर होते हैं।
4. तनाव की वजह से आप 3 से 4 गुना ज़्यादा सपने देखने लगते हैं।
5. तनाव आपको जल्दी बूढ़ा बना सकता हैं।
६. अमेरिका में हर 8 में से 1 आदमी डिप्रेशन से पीड़ित हैं।
7. कॉमेडियन और मजाकिया लोग ज्यादा डिप्रेशन में रहते हैं।
8. जो लोग इंटरनेट पर ज़्यादा वक्त बिताते हैं उनके डिप्रेशन में जाने, अकेला महसूस करने और पागल होने के चांसेस ज़्यादा होते हैं।
9. 1945 के मुकाबले आज 10 गुना ज्यादा लोग तनाव में रहने लगे हैं।
10. आईएसलैंड में सबसे ज्यादा लोग डिप्रेशन में रहते हैं।
11. अब्राहिम लिंकन डिप्रेशन के शिकार थे और अपने साथ चाकू रखने से बचते थे। उन्हें डर लगता था कि कहीं वे खुद को ही न मार लें।
12. हाथी और चिम्पांज़ी में भी डिप्रेशन और तनाव के लक्षण पाये गए हैं।
13. फ्रांस में हर 5 में से 1 व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हैं।
14. डिप्रेशन में होने पर आपका दिमाग आप पर चालें चलने लगता हैं। ये आप में आत्महत्या का ख्याल भी बना सकता हैं। डिप्रेशन से बच कर रहें।
15. डिप्रेशन से बचने के लिए जो जो सबसे उम्दा तरीके बतलाए जाते हैं, उनमें से एक जिम में कसरत करना और दूसरा पालतू जानवरों के साथ वक्त बिताना है। आपको अपने दिमाग को तंदरूस्त और मजबूत रखने के लिए कम से कम एक पालतू पशु रखना चाहिए।
16. डिप्रेशन आपको स्वार्थी बनाता है। दु:खी होने पर किसी और के बारे में सोचना मुश्किल होता है विवेक से काम लें और खुश रहने के तरीके अपनाएँ।
17. डिप्रेशन की वजह से आप 65 प्रतिशत समय तो चिंता में गुजार देते हैं।
18. लगातार चिड़चिड़ापन डिप्रेशन का लक्षण हो सकता है। अगर आप दुनिया, अपनी ज़िन्दगी और अपने चाहने वालों से परेशान हैं तो हो सकता है कि ये आपके दिमाग का फितूर हो।
19. डिप्रेशन आपके चाहने वालों के लिए भी उतना ही खतरनाक है जितना कि आपके लिए।
20. हर साल अमेरिका में 2 करोड़ नए लोग डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं।
21. तनाव वाला दिमाग चीजों को अलग तरह से देखता हैं।
22. 18 से 33 साल की उम्र तक आदमी सबसे ज्यादा तनाव में रहता है।
23. सिगरेट पीने वाले लोग, सिगरेट न पीने वाले और सिगरेट पीना छोड़ चुके लोगों की तुलना में अधिक तनाव ग्रस्त होते हैं।
24. देर रात तक कंप्यूटर पर काम आंखों, नसों और दिमाग में तनाव पैदा करता है।
25. ठन्डे पानी से नहाने से त्वचा अच्छी रहती है और तनाव दूर होता हैं।
26. तनाव में रहने वाला व्यक्ति खुद से ही झूठ बोलने की आदत पाल लेता है। आप चीजों से बचने की कोशिश करने लगते हैं या आप परिस्थितियों का सामने करने से कतराने लगते हैं।
27. 8० प्रतिशत डिप्रेशन पीड़ितों को इलाज नहीं मिल पाता हैं।
28. डिप्रेस्ड लोगों को सर्दी ज़ुकाम लगने के चांसेस नॉन-डिप्रेस्ड लोगों के मुक़ाबले ज़्यादा होते हैं।
29. आधी उम्र होने के बाद टेस्टोस्टेरोन की कमी की वजह से मर्दों के डिप्रेशन में जाने के चांसेस बढ़ जाते हैं।
30. मनोचिकित्सक कहते हैं कि तनाव या अवसाद के चलते आप ज्यादा सोचने लगते हैं और हमारा दिमाग उन समस्याओं को ईजाद कर लेता है जो पहले तक नहीं थीं।
31. आपको हफ्ते में कम से कम 2 से तीन बार सूर्योदय और सूर्यास्त को देखना चाहिए। आपको इससे तनाव से लड़ने में काफी मदद मिलेगी। यह एक मुफ्त और किफायती इलाज है।
32. वीडियो गेम खेलकर भी आप अपने तनाव से काफी हद तक मुक्ति पा सकते हैं। अगर कोई खेल आपको सकून देता है तो यह कतई न सोचें कि आप वक्त जाया कर रहे हैं।
33. सेक्स करने से तनाव कम होने के साथ-साथ सिर दर्द भी गायब हो जाता है।
34. रात को अच्छी नींद लेने से तनाव को कुछ हद तक रोका जा सकता हैं।
35. गुस्से को नियंत्रण करने के लिए आवश्यक है कि गहरी सांस लें और फिर बाहर निकालें। इस क्रिया से नर्वस सिस्टम एक्टिव हो जाता है, जिससे दिल की गति धीमी हो जाती है। इससे तनाव और क्रोध कम होने लगता है। इसीलिए जब भी क्रोध आए तो तीन बार जोर से सांस लें और बाहर छोड़ दें।
36. आधा घंटा पौधों की देखभाल करने से मानसिक तनाव से उतनी ही मुक्ति मिलती है, जितना कमरे में एक रूचिकर किताब का अध्ययन करने से मिलती हैं।
37. अगर आपको गुस्सा आ रहा है, तो अपने हाथों को एक-दूसरे के साथ रगड़ें। ऐसा करने से आप के हाथ गर्म होंगे और क्रोध के समय नर्वस सिस्टम में तेजी से बढ़ता रक्त प्रवाह स्लो हो जाएगा।
कभी आपने सोचा है कि आपको अचानक से क्या हो जाता है क्या यह डिप्रेशन है? चलिए आपको अवसाद या डिप्रेशन से जुड़ी कुछ रोचक बाते बताते हैं।
आज के दौर में डिप्रेशन या तनाव एक बीमारी की शक्ल ले चुका है। यह बीमारी ज्यादातर युवाओं को अपनी चपेट में लेती है। हम अक्सर अकेला महसूस करते हैं, निराश, असंतुष्ट और चीजों को गलत तरीके से लेने लगते हैं।
तनाव की चपेट में आने वाले लोग दुनिया के बारे में अधिक यथार्थवादी धारणा बना लेते हैं। खुशनुमा विचार व्यक्ति के दिमाग के अधिकांश दरवाजे बंद कर देता है और वह व्यक्ति के दिमाग को इस कदर प्रभावित करता है कि वह वास्तविकता के सबसे बुरे पक्ष की उपेक्षा करने लगता है या उसकी प्रवृत्ति पाल लेता है।
अगर आप 8 से 9 घंटे की अच्छी नींद लेते हैं तो आप खुद को आत्महत्या के विचार के बजाए डिप्रेशन से घिरने से बचा सकते हैं। आशा की जाती है कि हर किसी को अच्छी नींद लेनी चाहिए।
वहीं तनाव से लड़ने और काउंसलर की सलाह लेने के बजाए अच्छा संगीत तनाव से लड़ने में आपकी मदद कर सकता है। जितना हो सके आपको उम्दा संगीत सुनने की आदत डालनी चाहिए।
तनाव के कारण आपको सामान्य व्यवहार के मुकाबले एक नींद में तीन से चार बार सपने आ सकते हैं।
जिन लोगों का आईक्यू तेज होता है उनके तनाव से घिरने की संभावना तीन गुना बढ़ जाती है। क्योंकि उनके दिमाग में गतिविधियां काफी तेजी से होती है और यह स्मार्ट फोन के बेतरतीब इस्तेमाल से भी हो सकती हैं।
आकड़ों के मुताबिक अमेरिका में करीब 20 मिलियन लोग हर साल तनाव की चपेट में आते हैं। वहां हर चार में से एक युवा 24 साल की आयु से पहले पहले तनाव का दंश झेल चुका होता है।
जो लोग तनाव में होते हैं वो तनाव रहित लोगों की तुलना में ठंड जैसी बीमारियों की चपेट में जल्दी आ जाते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि साल 2030 तक अवसाद एचआईवी संक्रमण के बाद सबसे गंभीर और अक्षम बीमारी बन जाएगी।
ज्यादा क्रिएटिव लोग भी तनाव की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए ज्यादा क्रिएटिविटी दिखाना भी अच्छा नहीं है।
हिंसा, शोषण, उपेक्षा और गरीबी भी आपको तनाव के दलदल में धकेल सकती है इसलिए जरूरत पड़ने पर आपको हर किसी की मदद को तैयार रहना चाहिए।
डिप्रेशन में इंसान ऐसे खतरनाक कदम उठाता है, जो उसे नहीं उठाने चाहिए, जैसे कि शरीर को नुकसान पहुंचाना, आत्महत्या करने की कोशिश करना आदि। ऐसा माना जाता है कि 2030 तक आते-आते डिप्रेशन मनुष्य पर इतना हावी हो जाएगा कि मनुष्य की असमर्थता का दूसरा सबसे बड़ा कारण होगा।
ऐसा नहीं है डिप्रेशन कोई अभी की बीमारी है, यह हमारे पूर्वजों के ज़माने से चली आ रही है, परंतु चिंता का विषय यह है कि 21वीं सदी में इसका प्रभाव पहले से 10 गुना ज़्यादा बढ़ गया है।
आजकल लोग इंटरनेट (फेसबुक, वाट्सएप) पर फालतू समय व्यतीत करते हैं, वह अक्सर मानसिक परेशानियों में रहते हैं।
डिप्रेशन की वजह से इंसान अपना लगभग 65 प्रतिशत समय तो चिंता में गुज़ार देते हैं।
इंसान 18 से 33 साल की उम्र तक सबसे ज़्यादा तनाव महसूस करता हैं।
तनाव में रहने वाला इंसान खुद से और दूसरों से झूठ बोलने की आदत बना लेता है और वह इंसान हमेशा परिस्थितियों का सामना करने से कतराता है।

डिप्रेशन के समय इंसान यह सोचता है कि वह ज़िंदगी में कुछ नहीं कर सकता और वह अपनी हार स्वीकार कर लेता है. तो आइए जानते हैं इंसान डिप्रेशन से कैसे छुटकारा पा सकते हैं।

यदि आपको लगता है कि आप डिप्रेशन में जा रहे हैं, तो आप किसी मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर सहायता ले सकते हैं।
अगर आप इससे बाहर आना चाहते हैं तो आप इसकी वजह जानें और फिर सोचें कि उस वजह से कैसे बाहर निकल सकते हैं।
'कल क्या होगा' यह सोच-सोच कर हम अपनी परेशानियों को और भी बढ़ा देते हैं, इसलिए हमें आज के बारे में ही सोचना चाहिए और आज को बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए।
तनाव या दबाव को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप गाने सुनें। इससे तनाव में कमी आती है और इससे इंसान खुद को तरोताज़ा महसूस करता है।
इंसान डिप्रेशन को कम करने के लिए अक्सर शराब, ड्रग्स और नशीली चीज़ों का सहारा लेता है। नशीली चीज़ों का सेवन करने से कुछ देर के लिए तनाव दूर हो जाता है, लेकिन धीरे-धीरे इसकी लत बन जाती है। इसलिए इंसान को नशीली चीज़ों से दूर ही रहना चाहिए।
आपने किसी ऐसे इंसान को देखा होगा, जो अपने आप से बातें करता रहता है या फिर कोई ऐसा जो हमेशा मरने की बातें करता है। हर छोटी-छोटी बात पर रो देता है। आप उन खुशमिजाज लोगों से भी मिले होंगे, जो अचानक से किसी ऐसी चिंता में चले जाते हैं जिससे बाहर निकलना उन्हें मुश्किल लगता है। ऐसे लोग डिप्रेशन या मानसिक परेशानी के शिकार होते हैं।
रोजाना सूरज की रोशनी में कुछ देर बैठें।
बाहर टहलने जाएं। दोस्तों से बातें करें।
अपने काम का पूरा हिसाब रखें।
दिन भर में आप कितना काम करते हैं और किस गतिविधि को कितना समय देते हैं इस पर जरूर गौर करें। इससे आपको सभी गतिविधियों के बीच संतुलन बनाने में आसानी होगी। योग को दिनचर्या में शामिल करें।

डिप्रेशन या तनाव से बचने के तरीके
आज की मशीनी ज़िंदगी में हमारे पास ख़ुद के बारे में दो मिनट रुककर सोचने की फ़ुर्सत नहीं है। पर यह व्यस्तता हमें कहां ले जा रही है? डिप्रेशन यानी अवसाद की ओर। वर्ल्ड हेल्थ डे पर आई डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट इसकी पुष्टि करती है, जिसके मुताबिक़ पिछले एक दशक में डिप्रेशन के मामलों में 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। उस रिपोर्ट की सबसे चौंकानेवाली बात रही 25 प्रतिशत भारतीय किशोरों का डिप्रेशन का शिकार बताया जाना। उन आंकड़ों पर न जाते हुए आइए हम बात करते हैं डिप्रेशन के लक्षणों और इस मानसिक बीमारी से निपटने के कुछ तरीक़ों की।

पहचानें डिप्रेशन के लक्षण
आइए हमारे व्यवहार में आनेवाले उन बदलावों पर नज़र डालते हैं, जो बताते हैं कि हम डिप्रेशन यानी अवसाद का शिकार बनते जा रहे हैं। डिप्रेशन से उबरने के लिए इसके लक्षणों और संकेतों को समझना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि हम इस बारे में तभी मदद मांग सकते हैं, यदि हमें सही समय पर पता चल सकेगा कि हमारी ज़िंदगी में सबकुछ सही नहीं चल रहा है।

ये हैं डिप्रेशन के कुछ लक्षण
ठीक से नींद न आना
कम भूख लगना
अपराध बोध होना
हर समय उदास रहना
आत्मविश्वास में कमी
थकान महसूस होना और सुस्ती
उत्तेजना या शारीरिक व्यग्रता
मादक पदार्थों का सेवन करना
एकाग्रता में कमी
ख़ुदकुशी करने का ख्याल
किसी काम में दिलचस्पी न लेना
माता-पिता की उम्मीदों पर खरा उतरने का दबाव,
शिक्षा और रोजगार का दबाव
पारिवारिक समस्याएं
रिलेशनशिप की समस्याएं
हॉर्मोन्स में बदलाव और किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित होना।
किसी काम में अगर उम्मीद के मुताबिक सफलता न मिले या वह काम बिगड़ जाए।
कर्ज में डूबने की स्थिति में भी व्यक्ति डिप्रेशन में चला जाता है।

डिप्रेशन से बचने के उपाय यूं निपटें डिप्रेशन से
यदि आपको डिप्रेशन से बचना है तो इस बारे में खुलकर बात करें। रोज़मर्रा की ज़िंदगी में छोटे-छोटे बदलाव लाते हुए ख़ुद को व्यवस्थित कर लीजिए। ख़ुद को समय दें और अपने शरीर को भी। यह होगा कैसे, आइए जानते हैं।
1. बात करें, मदद मांगें
अवसाद से गुज़र रहे लोगों के लिए इससे उबरने के लिए नियमित तौर पर ऐसे व्यक्ति से बात करना जिनपर वे भरोसा करते हों या अपने प्रियजनों के संपर्क में रहना रामबाण साबित हो सकता है। आप खुलकर अपनी समस्याएं उनसे शेयर करें और परिस्थितियों से लड़ने के लिए उनकी मदद मांगें। इसमें शर्म जैसी कोई बात नहीं है। हमारे सबसे क़रीबी लोग यदि हमें बुरे समय से बाहर नहीं निकालेंगे तो कौन मदद करेगा?
2. सेहतमंद खाएं और रोज़ाना व्यायाम करें
सेहतमंद और संतुलित खानपान से मन ख़ुश रहता है. वहीं कई वैज्ञानिक शोध प्रमाणित करते हैं कि व्यायाम अवसाद को दूर करने का सबसे अच्छा तरीक़ा है। जब हम व्यायाम करते हैं तब सेरोटोनिन और टेस्टोस्टेरोन जैसे हार्मोन्स रिलीज़ होते हैं, जो दिमाग़ को स्थिर करते हैं। डिप्रेशन को बढ़ाने वाले विचार आने कम होते हैं। व्यायाम से हम न केवल सेहतमंद बनते हैं, बल्कि शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
3. अपने अंदर के लेखक को दोबारा जगाएं
कहते हैं मनोभावों को यदि आप किसी से व्यक्त नहीं कर सकते तो पेन और पेपर लेकर उन्हें लिख डालें। लिखने से अच्छा स्ट्रेस बस्टर शायद ही कुछ और हो। इसके अलावा अपनी लिखने से आत्मनिरीक्षण और विश्लेषण करने में मदद मिलती है। डायरी लिखने से लोग चमत्कारी ढंग से डिप्रेशन से बाहर आते हैं। इन दिनों ब्लॉग्स का भी ऑप्शन है। आप फ़ेसबुक पर भी अपने विचार साझा कर सकते हैं।
4. दोस्तों से जुड़ें और नकारात्मक लोगों से दूरी बनाएं
अच्छे दोस्त आपके मूड को अच्छा बनाए रखते हैं। उनसे आपको आवश्यक सहानुभूति भी मिलती है। वे आपकी बातों को ध्यान से सुनते हैं। डिप्रेशन के दौर में यदि कोई हमारे मनोभावों को समझे या धैर्य से सुन भी ले तो हमें अच्छा लगता है। दोस्तों से जुड़ने के साथ-साथ आप उन लोगों से ख़ुद को दूर कर लें, जो नकारात्मकता से भरे होते हैं। ऐसे लोग हमेशा दूसरों का मनोबल गिराने का काम करते हैं।
5. नौकरी की करें समीक्षा
इन दिनों कार्यस्थलों पर कर्मचारियों को ख़ुश रखने की बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, पर कई जगहों पर वास्तविकता इससे अलग होती है। यदि आप भी कार्यस्थल पर स्ट्रेस्ड महसूस करते हैं तो अपनी नौकरी की समीक्षा करें। हो सकता है कि नौकरी ही आपकी चिंता की वजह हो, जो आगे चलकर अवसाद का कारण बन जाए। ऐसी नौकरी को छोड़ दें, ताकि सुकून से जी सकें। वह नौकरी ही क्या जो आपको संतुष्टि और ख़ुशी न दे रही हो? आप अपने पसंद के क्षेत्र में नौकरी के विकल्प तलाश सकते हैं।
6. नियमित रूप से छुट्टियां लें
एक ही ऑफ़िस, शहर और दिनचर्या भी कई बार बोरियत पैदा करने वाले कारक होते हैं, जो आगे नकारात्मक विचार और फिर डिप्रेशन पैदा करते हैं। माहौल बदलते रहने से नकारात्मक विचारों को दूर रखने में मदद मिलती है। यदि लंबी छुट्टी न मिल रही हो तो सप्ताहांत पर ही कहीं निकल लें। रिसर्च कहते हैं कि नियमित रूप से छुट्टी पर जाने वाले लोग, लगातार कई सप्ताह तक काम में लगे रहने लोगों की तुलना में बहुत कम अवसादग्रस्त होते हैं।
7. नींदभर सोएं
एक अच्छी और पूरी रात की नींद हमें सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है। अध्ययनों से पता चला है कि रोज़ाना 7 से 8 घंटे सोने वाले लोगों में अवसाद के लक्षण कम देखे जाते हैं। इसलिए व्यस्तता के बावजूद अपनी नींद से समझौता न करें।
8. हल्का-फुल्का म्यूज़िक सुनें
जब लोग अवसादग्रस्त होते हैं तो अच्छा संगीत सुनकर उन्हें अच्छा लगता है। यह तथ्य कई वैज्ञानिक शोधों द्वारा प्रमाणित हो चुका है। तो जब भी मानसिक रूप से परेशान हों तो अपना पसंदीदा गाना सुनें। संगीत में मूड बदलने, मन को अवसाद से निकालने की अद्भुत ताक़त होती है। वैसे आप एक चीज़ का ख्याल रखें, ज़रूरत से ज़्यादा ग़म में डूबे हुए गाने न सुनें, क्योंकि ऐसा करने से आपका डिप्रेशन अगले लेवल पर पहुंच जाएगा।
9. पुरानी बातों के बारे में न सोचें
अपनी पुरानी भूलों और ग़लतियों का शिकवा करना आपको पूरी तरह से अवसाद के चंगुल में फंसा सकता है। एक तो पुरानी बातें आपके नियंत्रण में नहीं होतीं। फिर उस बारे में सोच-सोचकर क्या फ़ायदा? आप बेवजह अपने दिलोदिमाग़ पर गिल्ट का बोझ बढ़ाते हैं। पुरानी बातों के बारे में सोचने के बजाय आज पर फ़ोकस करें।
10. ख़ुद को लोगों से दूर न करें
जब आप अवसादग्रस्त होते हैं तब ख़ुद को दुनिया से दूर कर लेना सबसे आसान और ज़रूरी समाधान लगने लगता है। क्योंकि आपको लगता है कि आपकी समस्या को कोई दूसरा नहीं समझ सकता। लेकिन ख़ुद को लोगों से काटकर आप अवसाद को फलने-फूलने का मौक़ा उपलब्ध कराते हैं। यदि आप अपने दोस्तों और क़रीबियों से अपनी समस्या साझा नहीं कर सकते तो किसी मनोचिकित्सक से सलाह लें। इससे अवसाद की जड़ तक जाने और इसे दूर करने में मदद मिलेगी।
(उक्त जानकारी टेलीग्राम के रोचक तथ्य चैनल से साभार है, अधिक जानकारी किसी विशेषज्ञ से ली जा सकती है)